दहेज कुप्रथा
भारत में दहेज एक कुप्रथा
दहेज मूल रूप से शादी के दौरान दुल्हन के परिवार द्वारा दूल्हे के परिवार को नकदी, आभूषण ,फर्नीचर, संपत्ति और अन्य कीमती वस्तुएं दी जाती है उसे दहेज प्रणाली कहते हैं यह भारत में सदियों से प्रचलित है दहेज प्रणाली भारत में प्रचलित बुराइयों में से एक है
हालांकि सरकार ने दहेज के विरुद्ध नियम बनाए हैं लेकिन सख्ती से नहीं बनाए है इसलिए अभी भी दहेज प्रथा प्रचलित है
विवाह के दौरान दिए गए उपहार और दहेज के आदान-प्रदान पर कोई रोक नहीं है इसलिए ये कमी मुख्य कारणों में से एक है
कैसे मिलेगी समाज में बेटियों को आजादी
जब तक सच्चा ज्ञान नहीं हो जाता तब तक समाज में ऐसी बुराइयां होती रहेगी
समाज के नाम पर परंपराएं सामाजिक भेदभाव यही चलता रहेगा इसलिए सच्चा ज्ञान होना जरूरी है
और वह सच्चा ज्ञान संत रामपाल जी महाराज दे रहे हैं संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में अब तक कई दहेज मुक्त विवाह हो चुके हैं
दहेज मूल रूप से शादी के दौरान दुल्हन के परिवार द्वारा दूल्हे के परिवार को नकदी, आभूषण ,फर्नीचर, संपत्ति और अन्य कीमती वस्तुएं दी जाती है उसे दहेज प्रणाली कहते हैं यह भारत में सदियों से प्रचलित है दहेज प्रणाली भारत में प्रचलित बुराइयों में से एक है
हालांकि सरकार ने दहेज के विरुद्ध नियम बनाए हैं लेकिन सख्ती से नहीं बनाए है इसलिए अभी भी दहेज प्रथा प्रचलित है
विवाह के दौरान दिए गए उपहार और दहेज के आदान-प्रदान पर कोई रोक नहीं है इसलिए ये कमी मुख्य कारणों में से एक है
कैसे मिलेगी समाज में बेटियों को आजादी
जब तक सच्चा ज्ञान नहीं हो जाता तब तक समाज में ऐसी बुराइयां होती रहेगी
समाज के नाम पर परंपराएं सामाजिक भेदभाव यही चलता रहेगा इसलिए सच्चा ज्ञान होना जरूरी है
और वह सच्चा ज्ञान संत रामपाल जी महाराज दे रहे हैं संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में अब तक कई दहेज मुक्त विवाह हो चुके हैं
संत रामपाल जी महाराज ने समाज में जितनी भी बुराइयां व्याप्त है उन सब को खत्म करने का बीड़ा उठाया है
दहेज प्रथा हो या मृत्यु भोज हो
आप भी संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले सकते हैं


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